नवंबर 02, 2017

तेरी पायल की झनकार

        My new love poetry :-
#तेरी_पायल_की_झनकार_तेरी_चूड़ियों_की_खन_खन,
#सुन_के_डोले_रे_डोले_देखो_मेरा_तनमन_तनमन



22 अक्टूबर 2017 को अखिल भारतीय अघरिया समाज के तत्वाधान में आयोजित प्रथम साहित्य सम्मान समारोह (#कवि_सम्मेलन) में मैंने अपने जीवन का पहला कविता पाठ किया, सुखद संयोग था कि इसी दिन मैं अपना 29वां जन्म दिन मना रहा था। मुझे खेद है कि मैं अपने कविता पाठ का वीडियो उपलब्ध नहीं करा सकता क्योकि मेरे पास भी नहीं है। अतः आप श्री के लिए प्रस्तुत है मेरी कविता-


तेरी पायल की झनकार तेरी चूड़ियों की खन-खन,
सुन के डोले रे डोले देखो मेरा तनमन-तनमन।

बेचैनी छाई है दिल में, अजब सी मची है हलचल,
आहटें तेरी ही आती है, यादों में तू रहती हरपल,
कैसे समझाऊं खुद को, याद तुझे ही करता हूँ....
हिरण मन नहीं बस में, ये भटक रहा है बन-बन,
भटक के नाचे रे नाचे, देखो मेरा तनमन-तनमन।
सुन के डोले रे डोले......

दिल में उठती हैं लहरें, प्रेम प्रपात करती हैं कल-कल,
सपनों में आके यारा, अटखेलियां करती है चंचल,
कैसे समझाऊं खुद को, ख्वाब तेरा ही देखता हूँ......
मयूर मन नही बस में, ये नाच रहा है क्षम-क्षम,
सपने देखके नाचे रे नाचे, देखो मेरा तनमन-तनमन।
सुन के डोले रे डोले......

आसमान में देखूं तो, बादलों में छुप जाती है,
पंछी बनके पकड़ूँ तो, हवाओं में गुम हो जाती है,
कैसे समझाऊं खुद को, तलाश तेरा ही करता हूँ......
पंछी मन नही बस में, ये उड़ रहा है क्षन-क्षन,
उड़कर नाचे रे नाचे, देखो मेरा तनमन-तनमन।
सुन के डोले रे डोले......


तेरी पायल की झनकार, तेरी चुंडियों की खन-खन,
सुन के डोले रे डोले देखो मेरा तनमन-तनमन।
सुन के डोले रे डोले देखो मेरा तनमन-तनमन।

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