स्त्री, तू ही सृष्टि है....
1. सृष्टि की वही आदि, सृष्टि की वही अंत है,
सृष्टि की वही सीमा, सृष्टि की वही अनंत है,
प्रकृति वही, आकृति वही, स्त्री का यशगान लिखता हूँ ।
जीवन की वही आधार, जीवन की वही संचार है,
जीवन की वही अलंकार, जीवन की वही श्रृंगार है,
जननी वही, धरणी वही, स्त्री का गुणगान लिखता हूँ ।।
2. सभ्यता वही सिखाती, संस्कृति वही देती है,
आधारशिला परिवार की, शिक्षा वही देती है,
संस्कार वही, समाज वही, स्त्री का बखान करता हूँ ।
शांति का संदेश वही, वही शांति का आंदोलन है,
शांति का वृंदावन वही, वही कुरुक्षेत्र का भीषण रण है,
सत्संग वही, संग्राम वही, स्त्री का ही जयगान करता हूँ ।।
3. दुर्दशा भी उसी की, कष्ट भी वही सहती है,
शोषण भी उसी की, त्रस्त भी वही होती है,
सहन वही, शक्ति वही, स्त्री का करुणगान सुनता हूँ ।
घर-समाज से लड़ती, अपने अधिकारों को पाती है,
तब जाकर समाज उसके, चरणों मे शीश नवाती है,
रानी लक्ष्मी वही, कल्पना वही, तभी स्त्री को महान कहता हूँ ।।
-: दाता राम नायक "DR"
ग्राम- सुर्री, पोस्ट- तेतला, तह.- पुसौर, जिला- रायगढ़
Mob:- 7898586099
1. सृष्टि की वही आदि, सृष्टि की वही अंत है,
सृष्टि की वही सीमा, सृष्टि की वही अनंत है,
प्रकृति वही, आकृति वही, स्त्री का यशगान लिखता हूँ ।
जीवन की वही आधार, जीवन की वही संचार है,
जीवन की वही अलंकार, जीवन की वही श्रृंगार है,
जननी वही, धरणी वही, स्त्री का गुणगान लिखता हूँ ।।
2. सभ्यता वही सिखाती, संस्कृति वही देती है,
आधारशिला परिवार की, शिक्षा वही देती है,
संस्कार वही, समाज वही, स्त्री का बखान करता हूँ ।
शांति का संदेश वही, वही शांति का आंदोलन है,
शांति का वृंदावन वही, वही कुरुक्षेत्र का भीषण रण है,
सत्संग वही, संग्राम वही, स्त्री का ही जयगान करता हूँ ।।
3. दुर्दशा भी उसी की, कष्ट भी वही सहती है,
शोषण भी उसी की, त्रस्त भी वही होती है,
सहन वही, शक्ति वही, स्त्री का करुणगान सुनता हूँ ।
घर-समाज से लड़ती, अपने अधिकारों को पाती है,
तब जाकर समाज उसके, चरणों मे शीश नवाती है,
रानी लक्ष्मी वही, कल्पना वही, तभी स्त्री को महान कहता हूँ ।।
-: दाता राम नायक "DR"
ग्राम- सुर्री, पोस्ट- तेतला, तह.- पुसौर, जिला- रायगढ़
Mob:- 7898586099
बहुत खूब ....
जवाब देंहटाएंधन्यवाद भाई
हटाएंलेखक भी सराहनीय लेख भी सराहनीय ऐसे लेखक को मैं नमन करता हूँ।
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