प्रिय पाठकों, इस ब्लॉग में आपका आत्मीय अभिनंदन है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाएं मेरी स्वरचित साहित्य साधना हैं। मेरी रचनाओं के प्रति आपका प्रेम मुझे सदैव प्रेरित करता है।
अक्टूबर 13, 2015
हम परवाज़ करते हैं
मंज़िल कितना भी दूर हो क्यो ना, हम तो परवाज़ करते हैं ।
ताज ना मिले कोई गिला नही, हम तो दिलों पे राज करते हैं ।
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